Khatu Shyam Mela 2026

Khatu Shyam Mela 2026

खाटू श्याम लक्खी फाल्गुन मेला 2026

सीकर स्थित खाटूश्याम मंदिर में 21 से 28 फरवरी तक भव्य लक्खी फाल्गुन मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेले के पहले दो दिनों में ही लगभग 6.5 लाख श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं।

मेले के अंतिम तीन दिनों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार 72 घंटे दर्शन की व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर बाबा का दरबार 11 हजार डमरुओं और विदेशी फूलों से विशेष रूप से सजाया गया है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 4400 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। मेले में देशभर से भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। 🙏

बता दें कि इस वर्ष खाटूश्याम मेला 21 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है। मेले के शुरुआती दो दिनों में ही श्रद्धालुओं के जुनून ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पहले दिन करीब 2.5 लाख भक्तों ने शीश नवाया। वहीं, दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर 4 लाख तक पहुंच गई।

प्रशासन को उम्मीद है कि 8 दिनों के इस मेले में कुल 30 से 35 लाख श्रद्धालु बाबा के दर्शन करेंगे। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने निर्णय लिया है कि मेले के अंतिम तीन दिनों में बाबा का दरबार लगातार 72 घंटे खुला रहेगा, ताकि कोई भी भक्त बिना दर्शन के न लौटे।

विदेशी फूलों और 11 हजार डमरुओं से अलंकृत ‘शीश के दानी’ का दिव्य दरबार

इस वर्ष खाटू धाम की सजावट मानो किसी स्वप्नलोक की झलक प्रस्तुत कर रही है। मंदिर की पूरी थीम “शीश के दानी” अर्थात बर्बरीक की पावन गाथा पर आधारित रखी गई है, जिससे वातावरण भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत है।

दरबार को सुगंधित और भव्य स्वरूप देने के लिए केवल कोलकाता ही नहीं, बल्कि चीन और न्यूजीलैंड से भी हाइड्रेंजिया, लिली और ऑर्किड जैसे दुर्लभ एवं आकर्षक फूल मंगवाए गए हैं। लगभग 150 से अधिक कुशल कारीगरों ने दिन-रात अथक परिश्रम कर इस अद्भुत सजावट को साकार किया है।

शिवलोक सा दिव्य अहसास

इस बार मंदिर परिसर को 11,000 डमरुओं से सुसज्जित कर शिवमय वातावरण बनाया गया है। प्रवेश द्वार पर 20 फीट ऊँचा भव्य डमरू और हाथी का शिरोभाग श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण बना हुआ है। इसके साथ ही एक विशेष द्वार का निर्माण किया गया है, जहाँ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के एक साथ दर्शन का अद्भुत अवसर मिल रहा है।

मुख्य मार्ग को गुजरात से मंगाए गए 2000 रंग-बिरंगे छातों, मोरपंखी डिजाइनों और फूलों के झूमरों से सजाया गया है, जो आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह लेते हैं। लाखों की भीड़ को व्यवस्थित और सुरक्षित रखने के लिए इस बार आधुनिक तकनीक का भी विशेष रूप से उपयोग किया जा रहा है।

रींगस से खाटू तक आने वाले पदयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 17 किलोमीटर लंबा विशेष सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किया गया है, जिसमें वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रखा गया है।

श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए लगभग 25,000 गाड़ियों की क्षमता वाली विशाल पार्किंग व्यवस्था की गई है। पार्किंग स्थल से मंदिर तक पहुँचने हेतु मात्र 25 रुपये में ई-रिक्शा सेवा उपलब्ध कराई गई है, जिससे यात्रियों को सहज और सुलभ आवागमन की सुविधा मिल रही है।

पदयात्रियों का उत्साह: रींगस से खाटू तक उमड़ा केसरिया सैलाब

हाथों में श्याम ध्वज (निशान) लिए और नंगे पांव पदयात्रा करते श्रद्धालु बाबा के प्रति अपनी अटूट आस्था और समर्पण का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं। रींगस से खाटू तक पूरा मार्ग केसरिया रंग में रंगा नजर आ रहा है।

यात्रियों की सुविधा के लिए रास्ते में जगह-जगह विश्राम स्थलों, शीतल पेयजल, चिकित्सा सहायता और आकर्षक रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे उनकी यात्रा सहज और सुरक्षित बन सके।

चारों ओर भक्ति का माहौल है और हर दिशा में एक ही उद्घोष गूंज रहा है—
“हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा!” 🙏

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